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÷जिन्दगी एक सफरनामा है' − यह एहसास शायद जीवन और साहित्य का सबसे पुराना, सबसे नया, सबसे स्थूल और सबसे काल्पनिक ÷रुपक' है : वह जितना ही तात्कालिक है उतना ही समयातीत। जितना यथार्थ उतना ही प्रतीकार्थी। होमर के ÷यूलिसिस' से ÷जेम्स जॉयस के यूलिसिस' तक आदमी के इस दुनिया में अचानक आने, अकारण भटकने और अकस्मात चले जाने की विभिन्न मनः स्थितियों के सबसे सटीक और मार्मिक अनुभवों को पहचान देता हुआ रूपक। इस अनिवार्य जीवन स्थिति के तमाम बिम्बों, प्रतीकों, गूंजों और अनुगूंजों से विश्व साहित्य भरा पड़ा है। उक्त आशय की पृष्ठभूमि में लिखी गयी पांच कविताएं यहां दी जा रही हैं जिनका प्रत्यक्ष और परोक्ष संदर्भ आज की कई परिस्थितियों और मनःस्थितियों से जुड़ता है। ऐतिहासिक फासले अब केवल सात दिन लगते हैं पुराने जमानों में बरसों लगते थे दूरियों का भूगोल नहीं कितना ऐतिहासिक लगता है आज एक चीनी कविमित्र द्वारा बनाये यह मेरे एक चीनी कविमित्र का मुझे नहीं मालुम था कि मैं मैं कुछ सुन रहा था उसी समय में रेखाओं में एक कौतुक है उसमें कल्पना का रंग भरते ही शायद मैं विभिन्न देशों को जोड़ने वाले अगली यात्रा स्वागत में खड़ी परिचारिका कुछ ही देर बाद आकाशवाणी हुई − भीतर का दृश्य शांत और सुखद था। प्रस्थान के बाद कोने में खड़ी छड़ी पैताने रखे जूते पांव छूते सन्नाटा कहता − ÷÷घबराओ मत यादें कहतीं −÷÷भूल जाओ हमें अब सिरहाने खड़ा अंधेरे का लबादा एक बीमार बाकी बची दुनिया कोलम्बस का जहाज बाजारों में दूर ही से जरूरी है सावधानी TOP (Back to अनुक्रम) |